नियतांक

ऊपर अम्बर-आकाश में शुभ्र चाँद तुम-सा दिखा जमीं के फैलाव में मंजुल तुम चाँद-सी दिखीं जल के फैलाव में प्रांजल तुम चाँद हो गयीं जीवन के विस्तार में इस ना तुम बदलीं ना मैं बदला ना ही बदला चाँद जल-थल-नभ में प्रेम हमारा एक नियतांक की तरह रहा....❤

मुझे चाँद चहिए

मुझे चाँद चहिए... मैं पकड़ हथेली चाँद की दूर क्षितिज तक जाऊंगा वसुधा की गोद में सिर रखकर अंबर का माथा चूम लूंगा सागर की ऊंची लहरों से मैं अपने पाँव भिगो लूंगा मुझे चाँद चहिए सच कहता हूँ मुझे चाँद चहिए....

दुनिया को चुभती हैं

दुनिया को बोलती-बतियाती हंसती-ठहठहाती घूमती-फिरती बूझती-समझती चलती-उडती सजती-सँवरती गुनती-बुनती नकारती-फुफकारती निज डोर थामे हुए औरतें चुभती हैं !!

लड़कियां है तो

लडकियाँ हैं तो , शेष है उत्सव-उमंग गीत-संगीत और थाप मृदंग की लडकियाँ हैं तो , शेष है संस्कार-समाज रिश्ते-नाते और मर्यादा जीने की . लडकियाँ हैं तो , शेष है खनकती चूड़ियां सावन के झूले, मल्हार-कजरी लडकियाँ हैं तो ही शेष स्नेह-भाव अल्हड़ता समर्पण-प्रांजल , ढ़ेरो ख़ुशी . लडकियाँ हैं तो लिखी जाएगी सुरमई [...]

पाज़ेब

हमारे नाना के हज़ार किस्सों में से एक किस्सा पाज़ेब और स्वर्गवासी नानी को लेकर ❤ जो की मै कभी नहीं भूलता !! कविता के रूप में लिख रहा. कवि नाना से सवाल जवाब करता हुआ🐒🐵😂 ------------------------ यक्ष प्रश्न उठता है कि , पुरुष जीवन में पाज़ेब का क्या , महत्व ?? पुरुष होकर भी [...]